फेरो नज़र मेरी तरफ़ ऐ यार मेरे इस बेरुखी की अब नहीं दरकार तेरे इक चांद जो अटका हुआ मेरे फलक पर छूकर उसे, ढलने दो अब सरकार मेरे देखो जरा, कुछ जान बाक़ी रह गई हो बे-रंग कबसे मैं पड़ा, तुम भी यहीं हो कैद कर बाहों में मुझको ऐ सितमगर! चूम लो, मुझे गुलज़ार कर दो यार मेरे वायदा है आशिक़ी पुर-ज़ोर होगी जिंदगी यूं ही नहीं बे-नूर होगी भूल कर शिकवे गिले, अहद-ए-मोहब्बत मुझसे फिर इकबार कर लो यार मेरे तेरी सांसों से चले ये सांस मेरी जाओगे ग़र, जान भी जाएगी मेरी बरस बैठीं तो रोके ना रुकेंगी मेरी आँखें ऐसे ना रूठा करो ऐ प्यार मेरे।
प्यार मेरे
© Tushar Pandey · काव्यपथ
