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कविता

प्रेम गीत गाए

Tushar Pandey

भाग की पटखनी से
पैर डगमगाए
फ़िर भी मुस्कुराए,
हाय! प्रेम गीत गाए
जिद्दी मनवा
धूल झाड़ फिर उठ जाए।

मोह माया जाने बूझे
फ़िर भी इसे इश्क़ सूझे
आँख फिर फड़क आए रे!
लाख टोके ये ज़माना
छीने चाहें आशियाना
ख़्वाब नहीं छीन पाए रे!

टूटा जियरा जोड़-जोड़
फिर से सुगबुगाए
हाथ ये बढ़ाए
हाय! प्रेम गीत गाए
भोला मनवा
धूल झाड़ फिर उठ जाए।

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