शब्दों की अपनी राह

काव्यपथ

कभी कविता, कभी ख़याल — जो भीतर से निकले, वही यहाँ ठहरता है।

Tushar Pandey

लेखन47 लेख
2026-09-20

बे-नियाज़ी

इख़्तियार हो तो मैं कुछ ज़िक्र भी किया करूँ चार दिन की ज़िंदगी इस पे क्यों गुमाँ करूँ.. है कहाँ वो शख़्स जो गाता था नग़्मे इश्क़ के दफ़्न है मुझमें वो पर ये राज़ क्यों बयाँ करूँ.…

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2026-08-28T11:59:30.440Z

जागि जागि चौखट निहारूँ

कजरी

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2026-08-09T10:59:37.417Z

पुरुषत्व

कविता

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2026-08-08T10:41:46.273Z

ख्वाबदारी

to the dreamers

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2026-08-02T13:53:06.780Z

मौन की देहरी पर

तुम कौन हो?

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2026-07-23T16:23:06.733Z

रेलगाड़ी

एक साधारण सी कविता

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2026-07-16T16:48:46.285Z

अनायास

collection

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2026-07-12T13:21:44.911Z

पुराना सुकून वापस पाएं

आलेख

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2026-07-03T17:35:39.619Z

चिंचपोकळी' के समोसे

संस्मरण

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2026-06-28T09:02:10.311Z

साँझ भई औ कान्हा, दरसन ना दियौ आय

भक्ति पद

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2026-05-30T13:43:00.000Z

प्रेम गीत गाए

<pre class="preserved"भाग की पटखनी से पैर डगमगाए फ़िर भी मुस्कुराए, हाय! प्रेम गीत गाए जिद्दी मनवा धूल झाड़ फिर उठ जाए। मोह माया जाने बूझे फ़िर भी इसे इश्क़ सूझे आँख फिर फड़क आए …

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2026-05-26T13:42:00.000Z

चाँद

<pre class="preserved"वह कहती— चाँद हो तुम। सैंकड़ों मौन रस्ते, गीत गाते, मेरे खिलखिलाते चाँद। तन्हा तपती रातों में, मेरे संग जगते, दिल लुभाते चाँद। तुम्हें मैं घेर बाहों में, क…

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2026-05-24T03:51:00.000Z

डाह

सुदर्शन के खलिहान में ट्रैक्टर से अभी अभी उतारी हुई गेहूं की फसल से एक पहाड़नुमा आकृति बन गई थी। सर के ऊपर तेज खड़े चैत के सूरज के तले रखे गेहूं के दाने ऐसे चमकते जैसे स्वर्ण आभ…

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2026-05-10T03:50:00.000Z

यहां हर फ़ूल ब्यूटीफुल

पारिजात जब स्वर्ग से जमीन पर उतरा, तब उसे यहां हरसिंगार कहा गया। उसकी श्वेत, बेहद कोमल पंखुड़ियों को देखकर कभी नहीं लगता कि उसे धरती के लिए बनाया गया है। छोटी नारंगी डंठलों में …

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2026-05-03T03:49:00.000Z

खूबसूरत मोड़

साहिर का खूबसूरत मोड़, शायद उतना भी खूबसूरत नहीं।

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2026-04-11T13:41:00.000Z

प्रेम सुधा साँचा रस है

<pre class="preserved"स्वार्थ, द्वेष की फांस लिए, सब का, अपना ढेरा है। चाहे बंधु, सखा, कुल छूटे, कहते, ये मेरा, वो तेरा है! फिर शुष्क पड़े कुछ आंखों के, आतप जलते हतभागों के, हित…

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2026-04-04T13:40:00.000Z

इश्क़ में होना

<pre class="preserved"इश्क़ में होना, सैंकड़ों इंद्रधनुषों से, लबालब भर जाना होता है। और होता है, आंखों में, चांद लिए इतने हौले देखना, कि नजर ना चुभे कहीं। केवल पसरता रहे — ऊपर-ऊ…

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2026-03-14T13:39:00.000Z

ईप्सा

<pre class="preserved"दुनियावी ढोल मंजीरों के बीच, ओझल होतीं मेरी रवहीन सांसे। उचकता, उछलता और नाचता मैं — बेसुरा, एक अदना आदम। गीत बुनने की ईप्सा में, थकता-बुझता, कई जन्मों से …

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2026-03-03T13:38:00.000Z

तोहरे बिना सब सून

<pre class="preserved"सजना...तोहरे बिना सब सून सजना...तोहरे बिना सब सून तोहरे बिना सब सून चंदा मोरा, बदन जलाए चंदा मोरा, बदन जलाए तुम बिन तरसे मोरा जिया सजना...तोहरे बिना सब सून…

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2026-02-18T13:37:00.000Z

पूस मास बीति गयउ बाग बन जागि उठें

<pre class="preserved"पूस मास बीति गयउ बाग बन जागि उठें, काकलीख बांचहिं बैठि बात आपन चीति की। मीठि बयरिया में सुलगै अँकोरि मोरि, निष्ठुर बसंत आयउ कहुँ टोह नहिं मीत की। देब दनुज …

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2026-02-01T13:36:00.000Z

अधूरा लिखूंगा

<pre class="preserved"लिखने चलूं गर तुम्हारा ये चेहरा पहले कहूंगा कि सुंदर है चेहरा फ़िर थोड़ी और कोशिश करूं तो लिखूंगा कि कैसे तुम्हारी एक नज़र मुझे छू जाती है—ऐसे जैसे किसी नज…

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2025-12-18T03:41:00.000Z

पाप

साल का ये वह दौर था जब सर्दियां एक हठीले माशूक़ की तरह छोड़ जाने को तैयार ही नहीं हो रही थी। ठंड के कपड़े सूरज के निकलते ही कांटो की तरह बदन को चुभने लगते थे। फरवरी के उन आखिरी …

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2025-12-12T03:38:00.000Z

अजीब दास्तां है ये

मौत का भी इलाज हो शायदज़िंदगी का कोई इलाज नहीं- फ़िराक़ गोरखपुरी एक समय जब मेरे सारे मित्र और परिवार के लोग, गुलाबी ठंड का बहुआयामी तरीकों से मजे लेते हुए भी कॉल पर सर्दियों की…

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2025-12-03T13:35:00.000Z

प्यार मेरे

<pre class="preserved"फेरो नज़र मेरी तरफ़ ऐ यार मेरे इस बेरुखी की अब नहीं दरकार तेरे इक चांद जो अटका हुआ मेरे फलक पर छूकर उसे, ढलने दो अब सरकार मेरे देखो जरा, कुछ जान बाक़ी रह ग…

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2025-11-15T03:37:00.000Z

श्रृंगार

राजधानी के गगनचुंबी स्वर्ण अट्टालिकाओं के बीच सूरज पूरी शक्ति के साथ चमक रहा था। पर उसकी रोशनी रनिवास तक पहुंचते पहुंचते धूमिल हो उठती थी। रनिवास क्षेत्र के मुख्य भवन में आकर्षण…

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2025-10-29T03:36:00.000Z

वापसी

त्यौहारों के ख़त्म होते ही ऐसा लगता है मानो टीवी पर कार्टून देख रहे बच्चे को जबरदस्ती पढ़ने के लिए बिठा दिया गया हो। चंद घंटों पहले की चहल-पहल तुरंत शांत हो जाती है। मानो गहरी न…

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2025-10-26T13:34:00.000Z

मयरिया

<pre class="preserved"कातिक महिनवा मे सूरूज ठंडइलें लागल भोरे बहे शीतली बयरिया निमिया पर बईठल, चिरईया भी गावे एही मासे अइहें रे हमरो मयरिया काल्हे दुपहरिया में कान्हा पर झोरा कप…

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2025-10-18T13:33:00.000Z

उलफ़त

<pre class="preserved"ये अजब गज़ब के वादे कि ले आऊं तोड़ सितारे मैं? पुर-ज़ोर चमकना चेहरा उसका जैसे ले ही आया सारे मैं पहलू में बैठे मेरे यूं बहकी बातें कर जाती वो फ़िर बात-बात …

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2025-08-22T13:32:00.000Z

स्पर्श

<pre class="preserved"सोचो वे बड़े सुभागे होंगे! कितनी रातों को जागे होंगे! परस्पर्श नहीं जिनके जीवन, क्या गीत प्रेम के गाते होंगे? कुहक कुहक कोमल केकी, जब राग मीत के गाती होगी।…

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2025-08-19T13:31:00.000Z

पूजन

<pre class="preserved"प्रेमिकाएं अभिनत थीं उन्होंने उन्मुक्त कंठ से स्तुति की, गीत गाए उनके स्वामित्व और अपेक्षाओं ने चीख चीखकर रिक्त विज्ञप्त किया। जब भी गईं तोड़ गईं। नायिकाएं…

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2025-08-13T13:30:00.000Z

एक कतरा सुख

<pre class="preserved"कुछ बिखरा होगा बरसों पहले कोई चोट आई होगी दिल पर एक गहरा संताप या फिर बहुत थोड़ी मामूली सी बेचैनी, न जाने क्यों पसरी रहती है इनकी कालिमा जैसे पूनम की चांद …

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2025-07-26T13:27:00.000Z

इसक

<pre class="preserved"मैं इधर देखूं या उधर देखूं वो ही नज़र आए जिधर देखूं इसक की रंग का गहरा असर है न कोई ग़म, न कोई फ़िकर है ज़माना सुर्ख आंखे लाल लेकर कंटीले कायदों की ढाल लेकर …

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2025-07-14T13:27:00.000Z

सांख्य योग

<pre class="preserved"जीत हार का दंश, नहीं विचलित करता जिस नर को, तन, मन, धन सर्वस्व होम कर, फिरता निर्भीक समर को। मिथ्याओं के बीच बात जो सत्य शील की करता है, षड्यंत्रों से मुक्…

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2025-07-06T03:35:00.000Z

कई चाँद हैं सर-ए-आसमां

ट्रेन किसी छोटे से स्टेशन से गुजर रही थी। बनारस आने में अभी दो घंटे बाक़ी थे। अमर की नजर खिड़की से बाहर पेड़ों कि झुरमुट में छिपते निकलते सांझ के सूरज पर टिक गई। एक धुंधली हुई य…

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2025-06-23T13:25:00.000Z

सब कुछ अपना

<pre class="preserved"लक्ष्य निकट पर मार्ग कठिन हो क्षितिज दिखे पर सूर्य मलिन हो मन की शक्ति जब भी तेरी थोड़ी धुंधली होने आए उम्मीदों की ज्वाला को संशय का अंधियारा खाए थोड़ी आग …

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2024-10-03T13:23:00.000Z

व्हाइट नाइट्स

<pre class="preserved""सपनो में डूबा मैं हकीकी दुनिया से अनजान मुझे समेटने दो वो रुका हुआ चांद "ये बरबस गिरते दरियादिल बेचारे आंसू मत रोको इन्हे इनकी चोट से कोई घायल नही होगा। "…

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2024-08-03T13:22:00.000Z

खुशगवार शाम

<pre class="preserved"उठती बैठती मूक सांसे। तेज गिरती बारिश से धुलकर, और चटख होती, इक धुंधली-सी याद! होठों के नीचे एक नन्हा सा तिल। उसकी डूबती नजरों में गोते खाता, दुनिया में, प…

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2024-08-02T03:34:00.000Z

कूट-नीति

नेताजी जबसे दिल्‍ली से घर आए कुछ निराश से थे, उन्‍हें मायूस देख अगल बगल के दरबारियों में भी उदासी छा गई। पंद्रह वर्षों से सांसद रहते हुए भले ही नेताजी ने एक सड़क तक न बनवाई हो ल…

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2024-07-10T13:21:00.000Z

अलेक्जेंड्रिया

<pre class="preserved"अलस-सुब्ह गिरती-रुकती दुविधापूर्ण बारिश ढीठ दिहाड़ी मजदूर गड्ढों से बचते भागते लोग उधर बेपरवाह थोड़ी मदमत्त सबको हिकारत से ताकती स्कूटर की मखमली सीट पर बैठ…

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2023-07-01T03:32:00.000Z

पिकनिक

गली में हींग या कोई जड़ी-बूटी बेच रहा एक इंसानों जैसा ही कोई प्राणी जोर-जोर से कुछ चिल्ला रहा था। धंसे गाल और काकरूपी टांगे होते हुए भी उसमें इतनी ऊर्जा पता नहीं कहां से आ रही थ…

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2022-10-24T03:31:00.000Z

कलिकाल

पश्चिम में सूरज अस्ताचल पर्वत के सतहों में पिघलने लगा था। अंधेरे और बची खुची लालिमा के बीच संघर्ष से भयभीत खगों ने अब कूहना बंद कर दिया था। कुटिया के समीप गोवंशो की क्रीड़ा भी स…

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2022-10-23T03:30:00.000Z

गहरी नींद

किसी तेज धमाके ने मुझे जगाया। मुझे तेज ठंड लग रही थी। आंखे कुछ देर तक बोझिल ही थीं। कमरे में बहुत थोड़ी रोशनी बची थी। शायद सुबह हो गई थी। मैंने जोर से चिल्ला के अपने नौकर को आवा…

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2022-09-04T13:20:00.000Z

रणभेरी

<pre class="preserved"मन बल हो शिथिल लगे मार्ग जटिल कभी नीरस कोई लम्हा हो मन चीख उठे 'तुम तन्हा हो!' ये चीख कभी रुकने न दो पलकें अपनी झुकने न दो हो अंधियारा कितना भी घना तुम चिं…

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2022-05-06T13:18:00.000Z

आत्‍मावलोकन

<pre class="preserved"दिन के हिस्से जो रवि है देवताओं की छवि है काश ख़ुद का सूर्य होता रजनी को उपहार देता.. "हटा के बेड़ियां भीतर के मन की करूं स्वीकार मैं आखेट वन की तपाऊं अग्न…

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2022-04-15T13:16:00.000Z

श्री रामदरबार दृश्यावलोकन

<pre class="preserved"दृश्य बड़ा ही पावन है ऋतुओं में जैसे सावन है रामलला की झांकी ये मनहर, सुरम्य, मनभावन है अपने हिय को पल भर में चीर श्री धाम दिखाते महावीर। दरबार प्रकट, अद्भ…

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2021-12-30T13:15:00.000Z

शिव स्तुति

<pre class="preserved"जन्म लिया और जग देखा कानों में जो ध्वनि पड़ी, उसका सर्जक कौन था? भव ऊर्जा का शक्ति स्त्रोत पता नहीं क्यों मौन था? माता को कुछ गाते देखा किसी मंदिर, नित्य ह…

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2021-07-22T03:22:00.000Z

मनीऑर्डर

दस घंटे से ज्यादा का रेल का सफ़र थका देने वाला था।आंखें खुली तो पाया कि ट्रेन में शायद मैं अकेला ही था, सब उतर चुके थे। मुझे समझते देर नहीं लगी कि स्टेशन आ चुका था। आंखें मलते ह…

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