
शब्दों की अपनी राह
काव्यपथ
कभी कविता, कभी ख़याल — जो भीतर से निकले, वही यहाँ ठहरता है।
बे-नियाज़ी
इख़्तियार हो तो मैं कुछ ज़िक्र भी किया करूँ चार दिन की ज़िंदगी इस पे क्यों गुमाँ करूँ.. है कहाँ वो शख़्स जो गाता था नग़्मे इश्क़ के दफ़्न है मुझमें वो पर ये राज़ क्यों बयाँ करूँ.…
पढ़ें ↗जागि जागि चौखट निहारूँ
कजरी
पढ़ें ↗पुरुषत्व
कविता
पढ़ें ↗ख्वाबदारी
to the dreamers
पढ़ें ↗मौन की देहरी पर
तुम कौन हो?
पढ़ें ↗रेलगाड़ी
एक साधारण सी कविता
पढ़ें ↗अनायास
collection
पढ़ें ↗पुराना सुकून वापस पाएं
आलेख
पढ़ें ↗चिंचपोकळी' के समोसे
संस्मरण
पढ़ें ↗साँझ भई औ कान्हा, दरसन ना दियौ आय
भक्ति पद
पढ़ें ↗प्रेम गीत गाए
<pre class="preserved"भाग की पटखनी से पैर डगमगाए फ़िर भी मुस्कुराए, हाय! प्रेम गीत गाए जिद्दी मनवा धूल झाड़ फिर उठ जाए। मोह माया जाने बूझे फ़िर भी इसे इश्क़ सूझे आँख फिर फड़क आए …
पढ़ें ↗चाँद
<pre class="preserved"वह कहती— चाँद हो तुम। सैंकड़ों मौन रस्ते, गीत गाते, मेरे खिलखिलाते चाँद। तन्हा तपती रातों में, मेरे संग जगते, दिल लुभाते चाँद। तुम्हें मैं घेर बाहों में, क…
पढ़ें ↗डाह
सुदर्शन के खलिहान में ट्रैक्टर से अभी अभी उतारी हुई गेहूं की फसल से एक पहाड़नुमा आकृति बन गई थी। सर के ऊपर तेज खड़े चैत के सूरज के तले रखे गेहूं के दाने ऐसे चमकते जैसे स्वर्ण आभ…
पढ़ें ↗यहां हर फ़ूल ब्यूटीफुल
पारिजात जब स्वर्ग से जमीन पर उतरा, तब उसे यहां हरसिंगार कहा गया। उसकी श्वेत, बेहद कोमल पंखुड़ियों को देखकर कभी नहीं लगता कि उसे धरती के लिए बनाया गया है। छोटी नारंगी डंठलों में …
पढ़ें ↗खूबसूरत मोड़
साहिर का खूबसूरत मोड़, शायद उतना भी खूबसूरत नहीं।
पढ़ें ↗प्रेम सुधा साँचा रस है
<pre class="preserved"स्वार्थ, द्वेष की फांस लिए, सब का, अपना ढेरा है। चाहे बंधु, सखा, कुल छूटे, कहते, ये मेरा, वो तेरा है! फिर शुष्क पड़े कुछ आंखों के, आतप जलते हतभागों के, हित…
पढ़ें ↗इश्क़ में होना
<pre class="preserved"इश्क़ में होना, सैंकड़ों इंद्रधनुषों से, लबालब भर जाना होता है। और होता है, आंखों में, चांद लिए इतने हौले देखना, कि नजर ना चुभे कहीं। केवल पसरता रहे — ऊपर-ऊ…
पढ़ें ↗ईप्सा
<pre class="preserved"दुनियावी ढोल मंजीरों के बीच, ओझल होतीं मेरी रवहीन सांसे। उचकता, उछलता और नाचता मैं — बेसुरा, एक अदना आदम। गीत बुनने की ईप्सा में, थकता-बुझता, कई जन्मों से …
पढ़ें ↗तोहरे बिना सब सून
<pre class="preserved"सजना...तोहरे बिना सब सून सजना...तोहरे बिना सब सून तोहरे बिना सब सून चंदा मोरा, बदन जलाए चंदा मोरा, बदन जलाए तुम बिन तरसे मोरा जिया सजना...तोहरे बिना सब सून…
पढ़ें ↗पूस मास बीति गयउ बाग बन जागि उठें
<pre class="preserved"पूस मास बीति गयउ बाग बन जागि उठें, काकलीख बांचहिं बैठि बात आपन चीति की। मीठि बयरिया में सुलगै अँकोरि मोरि, निष्ठुर बसंत आयउ कहुँ टोह नहिं मीत की। देब दनुज …
पढ़ें ↗अधूरा लिखूंगा
<pre class="preserved"लिखने चलूं गर तुम्हारा ये चेहरा पहले कहूंगा कि सुंदर है चेहरा फ़िर थोड़ी और कोशिश करूं तो लिखूंगा कि कैसे तुम्हारी एक नज़र मुझे छू जाती है—ऐसे जैसे किसी नज…
पढ़ें ↗पाप
साल का ये वह दौर था जब सर्दियां एक हठीले माशूक़ की तरह छोड़ जाने को तैयार ही नहीं हो रही थी। ठंड के कपड़े सूरज के निकलते ही कांटो की तरह बदन को चुभने लगते थे। फरवरी के उन आखिरी …
पढ़ें ↗अजीब दास्तां है ये
मौत का भी इलाज हो शायदज़िंदगी का कोई इलाज नहीं- फ़िराक़ गोरखपुरी एक समय जब मेरे सारे मित्र और परिवार के लोग, गुलाबी ठंड का बहुआयामी तरीकों से मजे लेते हुए भी कॉल पर सर्दियों की…
पढ़ें ↗प्यार मेरे
<pre class="preserved"फेरो नज़र मेरी तरफ़ ऐ यार मेरे इस बेरुखी की अब नहीं दरकार तेरे इक चांद जो अटका हुआ मेरे फलक पर छूकर उसे, ढलने दो अब सरकार मेरे देखो जरा, कुछ जान बाक़ी रह ग…
पढ़ें ↗श्रृंगार
राजधानी के गगनचुंबी स्वर्ण अट्टालिकाओं के बीच सूरज पूरी शक्ति के साथ चमक रहा था। पर उसकी रोशनी रनिवास तक पहुंचते पहुंचते धूमिल हो उठती थी। रनिवास क्षेत्र के मुख्य भवन में आकर्षण…
पढ़ें ↗वापसी
त्यौहारों के ख़त्म होते ही ऐसा लगता है मानो टीवी पर कार्टून देख रहे बच्चे को जबरदस्ती पढ़ने के लिए बिठा दिया गया हो। चंद घंटों पहले की चहल-पहल तुरंत शांत हो जाती है। मानो गहरी न…
पढ़ें ↗मयरिया
<pre class="preserved"कातिक महिनवा मे सूरूज ठंडइलें लागल भोरे बहे शीतली बयरिया निमिया पर बईठल, चिरईया भी गावे एही मासे अइहें रे हमरो मयरिया काल्हे दुपहरिया में कान्हा पर झोरा कप…
पढ़ें ↗उलफ़त
<pre class="preserved"ये अजब गज़ब के वादे कि ले आऊं तोड़ सितारे मैं? पुर-ज़ोर चमकना चेहरा उसका जैसे ले ही आया सारे मैं पहलू में बैठे मेरे यूं बहकी बातें कर जाती वो फ़िर बात-बात …
पढ़ें ↗स्पर्श
<pre class="preserved"सोचो वे बड़े सुभागे होंगे! कितनी रातों को जागे होंगे! परस्पर्श नहीं जिनके जीवन, क्या गीत प्रेम के गाते होंगे? कुहक कुहक कोमल केकी, जब राग मीत के गाती होगी।…
पढ़ें ↗पूजन
<pre class="preserved"प्रेमिकाएं अभिनत थीं उन्होंने उन्मुक्त कंठ से स्तुति की, गीत गाए उनके स्वामित्व और अपेक्षाओं ने चीख चीखकर रिक्त विज्ञप्त किया। जब भी गईं तोड़ गईं। नायिकाएं…
पढ़ें ↗एक कतरा सुख
<pre class="preserved"कुछ बिखरा होगा बरसों पहले कोई चोट आई होगी दिल पर एक गहरा संताप या फिर बहुत थोड़ी मामूली सी बेचैनी, न जाने क्यों पसरी रहती है इनकी कालिमा जैसे पूनम की चांद …
पढ़ें ↗इसक
<pre class="preserved"मैं इधर देखूं या उधर देखूं वो ही नज़र आए जिधर देखूं इसक की रंग का गहरा असर है न कोई ग़म, न कोई फ़िकर है ज़माना सुर्ख आंखे लाल लेकर कंटीले कायदों की ढाल लेकर …
पढ़ें ↗सांख्य योग
<pre class="preserved"जीत हार का दंश, नहीं विचलित करता जिस नर को, तन, मन, धन सर्वस्व होम कर, फिरता निर्भीक समर को। मिथ्याओं के बीच बात जो सत्य शील की करता है, षड्यंत्रों से मुक्…
पढ़ें ↗कई चाँद हैं सर-ए-आसमां
ट्रेन किसी छोटे से स्टेशन से गुजर रही थी। बनारस आने में अभी दो घंटे बाक़ी थे। अमर की नजर खिड़की से बाहर पेड़ों कि झुरमुट में छिपते निकलते सांझ के सूरज पर टिक गई। एक धुंधली हुई य…
पढ़ें ↗सब कुछ अपना
<pre class="preserved"लक्ष्य निकट पर मार्ग कठिन हो क्षितिज दिखे पर सूर्य मलिन हो मन की शक्ति जब भी तेरी थोड़ी धुंधली होने आए उम्मीदों की ज्वाला को संशय का अंधियारा खाए थोड़ी आग …
पढ़ें ↗व्हाइट नाइट्स
<pre class="preserved""सपनो में डूबा मैं हकीकी दुनिया से अनजान मुझे समेटने दो वो रुका हुआ चांद "ये बरबस गिरते दरियादिल बेचारे आंसू मत रोको इन्हे इनकी चोट से कोई घायल नही होगा। "…
पढ़ें ↗खुशगवार शाम
<pre class="preserved"उठती बैठती मूक सांसे। तेज गिरती बारिश से धुलकर, और चटख होती, इक धुंधली-सी याद! होठों के नीचे एक नन्हा सा तिल। उसकी डूबती नजरों में गोते खाता, दुनिया में, प…
पढ़ें ↗कूट-नीति
नेताजी जबसे दिल्ली से घर आए कुछ निराश से थे, उन्हें मायूस देख अगल बगल के दरबारियों में भी उदासी छा गई। पंद्रह वर्षों से सांसद रहते हुए भले ही नेताजी ने एक सड़क तक न बनवाई हो ल…
पढ़ें ↗अलेक्जेंड्रिया
<pre class="preserved"अलस-सुब्ह गिरती-रुकती दुविधापूर्ण बारिश ढीठ दिहाड़ी मजदूर गड्ढों से बचते भागते लोग उधर बेपरवाह थोड़ी मदमत्त सबको हिकारत से ताकती स्कूटर की मखमली सीट पर बैठ…
पढ़ें ↗पिकनिक
गली में हींग या कोई जड़ी-बूटी बेच रहा एक इंसानों जैसा ही कोई प्राणी जोर-जोर से कुछ चिल्ला रहा था। धंसे गाल और काकरूपी टांगे होते हुए भी उसमें इतनी ऊर्जा पता नहीं कहां से आ रही थ…
पढ़ें ↗कलिकाल
पश्चिम में सूरज अस्ताचल पर्वत के सतहों में पिघलने लगा था। अंधेरे और बची खुची लालिमा के बीच संघर्ष से भयभीत खगों ने अब कूहना बंद कर दिया था। कुटिया के समीप गोवंशो की क्रीड़ा भी स…
पढ़ें ↗गहरी नींद
किसी तेज धमाके ने मुझे जगाया। मुझे तेज ठंड लग रही थी। आंखे कुछ देर तक बोझिल ही थीं। कमरे में बहुत थोड़ी रोशनी बची थी। शायद सुबह हो गई थी। मैंने जोर से चिल्ला के अपने नौकर को आवा…
पढ़ें ↗रणभेरी
<pre class="preserved"मन बल हो शिथिल लगे मार्ग जटिल कभी नीरस कोई लम्हा हो मन चीख उठे 'तुम तन्हा हो!' ये चीख कभी रुकने न दो पलकें अपनी झुकने न दो हो अंधियारा कितना भी घना तुम चिं…
पढ़ें ↗आत्मावलोकन
<pre class="preserved"दिन के हिस्से जो रवि है देवताओं की छवि है काश ख़ुद का सूर्य होता रजनी को उपहार देता.. "हटा के बेड़ियां भीतर के मन की करूं स्वीकार मैं आखेट वन की तपाऊं अग्न…
पढ़ें ↗श्री रामदरबार दृश्यावलोकन
<pre class="preserved"दृश्य बड़ा ही पावन है ऋतुओं में जैसे सावन है रामलला की झांकी ये मनहर, सुरम्य, मनभावन है अपने हिय को पल भर में चीर श्री धाम दिखाते महावीर। दरबार प्रकट, अद्भ…
पढ़ें ↗शिव स्तुति
<pre class="preserved"जन्म लिया और जग देखा कानों में जो ध्वनि पड़ी, उसका सर्जक कौन था? भव ऊर्जा का शक्ति स्त्रोत पता नहीं क्यों मौन था? माता को कुछ गाते देखा किसी मंदिर, नित्य ह…
पढ़ें ↗मनीऑर्डर
दस घंटे से ज्यादा का रेल का सफ़र थका देने वाला था।आंखें खुली तो पाया कि ट्रेन में शायद मैं अकेला ही था, सब उतर चुके थे। मुझे समझते देर नहीं लगी कि स्टेशन आ चुका था। आंखें मलते ह…
पढ़ें ↗