विशेष संग्रह

इश्क़ पर तुषार की प्रतिनिधि रचनाएं

प्रेम और इश्क़ की चुनिंदा रचनाएँ · 7 रचनाएँ

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प्यार मेरे

फेरो नज़र मेरी तरफ़ ऐ यार मेरे इस बेरुखी की अब नहीं दरकार तेरे इक चांद जो अटका हुआ मेरे फलक पर छूकर उसे, ढलने दो अब सरकार मेरे देखो जरा, कुछ…

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इसक

मैं इधर देखूं या उधर देखूं वो ही नज़र आए जिधर देखूं इसक की रंग का गहरा असर है न कोई ग़म, न कोई फ़िकर है ज़माना सुर्ख आंखे लाल लेकर कंटीले कायद…

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उलफ़त

ये अजब गज़ब के वादे कि ले आऊं तोड़ सितारे मैं? पुर-ज़ोर चमकना चेहरा उसका जैसे ले ही आया सारे मैं पहलू में बैठे मेरे यूं बहकी बातें कर जाती व…

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इश्क़ में होना

इश्क़ में होना, सैंकड़ों इंद्रधनुषों से, लबालब भर जाना होता है। और होता है, आंखों में, चांद लिए इतने हौले देखना, कि नजर ना चुभे कहीं। केवल पस…

36

चाँद

वह कहती— चाँद हो तुम। सैंकड़ों मौन रस्ते, गीत गाते, मेरे खिलखिलाते चाँद। तन्हा तपती रातों में, मेरे संग जगते, दिल लुभाते चाँद। तुम्हें मैं घ…

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कई चाँद हैं सर-ए-आसमां

ट्रेन किसी छोटे से स्टेशन से गुजर रही थी। बनारस आने में अभी दो घंटे बाक़ी थे। अमर की नजर खिड़की से बाहर पेड़ों कि झुरमुट में छिपते निकलते सा…

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अनायास

1. संशयों का एक मायावी दानव तैयार बैठा था लीलने को सारी उम्मीदें, सारे सपने कर देने को निष्प्राण तैयार बैठा था मन में ढूंढने को एक कोना जो म…