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लघुकथा

7 रचनाएँ

35

डाह

सुदर्शन के खलिहान में ट्रैक्टर से अभी अभी उतारी हुई गेहूं की फसल से एक पहाड़नुमा आकृति बन गई थी। सर के ऊपर तेज खड़े चैत के सूरज के तले रखे ग…

26

पाप

साल का ये वह दौर था जब सर्दियां एक हठीले माशूक़ की तरह छोड़ जाने को तैयार ही नहीं हो रही थी। ठंड के कपड़े सूरज के निकलते ही कांटो की तरह बदन…

23

श्रृंगार

राजधानी के गगनचुंबी स्वर्ण अट्टालिकाओं के बीच सूरज पूरी शक्ति के साथ चमक रहा था। पर उसकी रोशनी रनिवास तक पहुंचते पहुंचते धूमिल हो उठती थी। र…

10

कूट-नीति

नेताजी जबसे दिल्‍ली से घर आए कुछ निराश से थे, उन्‍हें मायूस देख अगल बगल के दरबारियों में भी उदासी छा गई। पंद्रह वर्षों से सांसद रहते हुए भले…

08

पिकनिक

गली में हींग या कोई जड़ी-बूटी बेच रहा एक इंसानों जैसा ही कोई प्राणी जोर-जोर से कुछ चिल्ला रहा था। धंसे गाल और काकरूपी टांगे होते हुए भी उसमे…

06

गहरी नींद

किसी तेज धमाके ने मुझे जगाया। मुझे तेज ठंड लग रही थी। आंखे कुछ देर तक बोझिल ही थीं। कमरे में बहुत थोड़ी रोशनी बची थी। शायद सुबह हो गई थी। मै…

01

मनीऑर्डर

दस घंटे से ज्यादा का रेल का सफ़र थका देने वाला था।आंखें खुली तो पाया कि ट्रेन में शायद मैं अकेला ही था, सब उतर चुके थे। मुझे समझते देर नहीं …