विशेष संग्रह
चुनिंदा कहानी श्रृंखलाएं
क्रमबद्ध कथाएँ और धारावाहिक · 2 रचनाएँ
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कलिकाल
पश्चिम में सूरज अस्ताचल पर्वत के सतहों में पिघलने लगा था। अंधेरे और बची खुची लालिमा के बीच संघर्ष से भयभीत खगों ने अब कूहना बंद कर दिया था। …
कई चाँद हैं सर-ए-आसमां
ट्रेन किसी छोटे से स्टेशन से गुजर रही थी। बनारस आने में अभी दो घंटे बाक़ी थे। अमर की नजर खिड़की से बाहर पेड़ों कि झुरमुट में छिपते निकलते सा…