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7 रचनाएँ
मौन की देहरी पर
रात के हल्के धुंधलके में सैकड़ों बिसरी हुई दास्तानों ने एक साथ दस्तक दे दी है। नीले आसमान की रगों में कालिमा पसरती हुई दिख रही है। आसमान से …
पुराना सुकून वापस पाएं
सुबह से ही तेज गिर रही बारिश थोड़ी रुक गई है। धान के कोमल नन्हें पौधों की नाज़ुक जड़ें थामे, मेंढक-मेंढकियां, बादलों की ओट से छुपके, ज़रा चु…
चिंचपोकळी'' के समोसे
ऑफिस में किसी ने नाश्ते का डब्बा मंगवाया था। देर से नाश्ता मिलने पर एकसाथ ढोकला, समोसा पर धधककर टूटते हुए ये एहसास हुआ कि शायद भूख का स्वाद …
यहां हर फ़ूल ब्यूटीफुल
पारिजात जब स्वर्ग से जमीन पर उतरा, तब उसे यहां हरसिंगार कहा गया। उसकी श्वेत, बेहद कोमल पंखुड़ियों को देखकर कभी नहीं लगता कि उसे धरती के लिए …
खूबसूरत मोड़
दोपहर बेवक्त नींद टूटती है और मैं बिस्तर पर औंधे लेटे हुए, बगल की दीवार पर नजरें धंसाए, खुद को खोया हुआ पाता हूं। ये किसका घर है, मैं यहां क…
अजीब दास्तां है ये
मौत का भी इलाज हो शायदज़िंदगी का कोई इलाज नहीं- फ़िराक़ गोरखपुरी एक समय जब मेरे सारे मित्र और परिवार के लोग, गुलाबी ठंड का बहुआयामी तरीकों स…
वापसी
त्यौहारों के ख़त्म होते ही ऐसा लगता है मानो टीवी पर कार्टून देख रहे बच्चे को जबरदस्ती पढ़ने के लिए बिठा दिया गया हो। चंद घंटों पहले की चहल-प…